Friday, 29 August 2025

दुनिया युद्ध की विभीषिका से परेशान है व प्रलय , भूकंप से पीड़ित होकर ख़ौफ़ का माहौल है










दुनिया युद्ध की विभीषिका से परेशान है व प्रलय , भूकंप से पीड़ित होकर ख़ौफ़ का माहौल है
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संयुक्त राज्य अमेरिका का डोनाल्ड डॉलर डांसिंग डक जिसने पूरी दुनिया पर टैरिफ़ वॉर से आक्रमण की नीति अपनाकर एक नई “हल -चल “ की चाल चल दी है

Donald Dollar Dancing Duck of the United States of America has started a new "stirring" move by adopting the policy of attacking the whole world with tariff war 

Wednesday, 27 August 2025

गणपति बप्पा मोरिया .., ट्रम्प का हिंदुस्तान पर ५०% टैरिफ हो रिया ..






 





गणपति बप्पा मोरिया .., ट्रम्प का हिंदुस्तान पर ५०% टैरिफ हो रिया ..

चीन अब मौन नही.., ट्रम्प के हाथी की सूंड को ड्रैगन द्वारा दबोचने के बावजूद , अमेरिका अब भी दुर्लभ खनिज (Rare Earth)के लिए चीन से याचनाएँ कर रहा है व बिना टैरिफ़ से भारी मात्रा में ख़रीद रहा है लेकिन चीन ने इस सौदे को फ़िलहाल रद्द कर दिया है 

अमेरिका के चिप बनाने वाली प्रसिद्ध कंपनी “NVIDIA” के बड़े आयात को चीन ने यह कहकर रद्द कर दिया की इस चिप से चीन की जासूसी हो सकती है

चीन अमेरिका के धैर्य की परीक्षा ले रहा है व पेंटागन से दस गुना ज़्यादा ज़मीन से  सेना का  विस्तार कर , अमेरिका के होश उड़ा दिए है व चुनौती देते हुए कहा चीन अगले ३ साल में विश्व में युद्ध व हर शक्ति में अग्रणी होगा , 

१ अक्टूबर १९४९ को चीन का ७६ वाँ स्वतंत्रता दिवस है व इस दिन दुनिया को अपना शक्ति प्रदर्शन का दर्शन कराएगा

अपनी भाषा की शिक्षा से व विदेशी हाथ साथ विचार भाषा को भगाकर चीन की उन्नता को देखकर विश्व अचंभित है 
कर्ज की कूटनीति से छोटे देशों का शोषण से चीन की अर्थ व
व्यवस्था २० ट्रिलियन को पार कर अब अमेरिका के ४० ट्रिलियन को पार करने का संकल्प लेकर इसे ३ साल में पूरा करने का लक्ष्य रखा है 
दोस्तों दु:ख के साथ लिखना पड़ रहा देश में १५ करोड़ घुसपैठियों की पहचान चुनाव आयोग द्वारा करने पर विपक्षी पार्टियों में मातम फैला है वी सांसद से सुप्रीम कोर्ट वी रैलियों से देश का धन व समय से देश को गर्त में ले जाने का कुकृत्य कर रहें हैं 

विश्व में युद्ध की अस्थिरता को देखकर यदि देश चौकन्ना नही रहा कभी भी युद्ध के जाल में झोखा जा सकता 

अंत में चीन की शक्ति का कमाल ..!!!  

चीन की सेना १९ देशों  से मिलती है 
क्या मजाल को घुसपैठिया से मक्खी भी चीन में नही घुस सकती है 
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ट्रम्प के हाथी की सूंड से टैरिफ की ताक़त से ड्रैगन के खिलाफ भयानक युद्ध

A terrible war against the dragon with the power of tariffs from Trump's elephant's trunk

Friday, 22 August 2025

अबकी बार हिंदू समर्थकों के वोटों की धोखाघड़ी से ट्रम्प का मोदी पर टैरिफ के खंजर से वार कर अपने अच्छे दिन ला रहा है .












        



चेतो मोदी सरकार देशवासियों की गुहार ..,
Howdy modi..,
अबकी बार ट्रम्प का टैरिफ से देश में terrific वॉर,
मोदी से दोस्ती के छद्म खेल से अमेरिका में हिंदू वोटों पर किया अधिकार से ५० से १०० प्रतिशत के टैरिफ वॉर से पीठ में भोंका खंजर
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पाकिस्तान को गोद में बिठाकर
क्रिप्टो करेंसी पर अधिकार से बांग्लादेश को पुचकार कर देश के चिकन नेक (मुर्गे की गर्दनें) काटने का शुरू होगा अब खेल
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देश को इस खेल में बाहरी व देश के गद्दारों से निपटने के लिए आर पार की लड़ाई की साजिश को निपटाने की तैयारी कर सेना को खुली छूट मिलनी चाहिए, न की नेताओं के युद्ध विराम की साजिश
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१९६६ की लड़ाई में लाहौर जीतने के बाद हमने प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की हत्या से खो दिया
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१९७१ में युद्ध जीतने के बावजूद हमने पीओके छोड़ दिया व ९३ हज़ार पाकिस्तानी सेना के क़ैदियों को ३ साल तक पालकर मुस्टंडे बनाकर , पाकिस्तान को ससम्मान सौंपा
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कारगिल , संसद हमले , मुंबई , पठानकोट,पुलवामा हमले से हमने सबक नही सीखा
सीज फायर के दबाव में हमने Pok को देश में मिलाने का सुनहरा अवसर खो दिया
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अबकी बार हिंदू समर्थकों के वोटों की धोखाघड़ी से ट्रम्प का मोदी पर टैरिफ के खंजर से वार कर अपने अच्छे दिन ला रहा है ..
This time, by cheating the Hindu supporters with their votes, Trump is bringing about his good days by attacking Modi with the dagger of tariffs.
अब आर पार का प्रतिशोध होगा
Now there will be retribution




 





Saturday, 9 August 2025

हिंदुत्व ही बंधुत्व है, पूरा विश्व ही हिन्दू का तत्व है...,


 

१. हिंदुत्व ही बंधुत्व है, पूरा विश्व ही हिन्दू का तत्व है..., अब आरक्षण,जातिवाद,भाषावाद  की तलवार, एक नई धार से, नेताओं के वोट बैंक की दांत की चमक के पैने पन की तस्वीर से, आज देश ऊंचाई को छूने की बजाय “बौना” होते जा रहा है.., 


२. आजादी के मसीहा कहकर, छद्म पुतलों व सडकों के नाम देखकर.., देश को “चौपटनगरी” कर, अंधे राजाओं को देखकर , आज भी भारतमाता “आह” भर.., कराह कर, कह रही है.., ७८ सालों बाद भी..!!!, मेरे १४०  करोड़ बेटों को किस तरह, विदेशी हाथ- विदेशी साथ – विदेशी विचार- विदेशी संस्कार , जाति, भाषा व धर्मपरिवर्तन से आपस में, लड़ाकर..., कैसे मेरे कटे अंगो के घाव सहित , पुन: मुझे विदेशी जंजीरों से बांधने का प्रयास किया जा रहा है.


३. कहां गए...!!!!!, मेरे वीर सपूत विनायक सावरकर, भगत सिंग ,राजगुरू, आजाद, सुभाष चन्द्र,रानी लक्ष्मीबाई पुत्री व अन्य लाखों क्रांतीकारी जिनके विचारों को ताबूत में बंद कर दिया.., क्या आज की गुलामों की शिक्षा से, अब अब्दुल कलाम जैसे राष्ट्रवादी प्रतिभाओ का जन्म होगा...


४. वासुधैव कुटुम्बकम के इस धागे में, धर्म परिवर्तन, जातिवाद, भाषावाद, अलगाववाद व घुसपैठीयों के वोट बैंक के विभिन्न रंगों के लेप से इस हिन्दुस्थानी धागे को तोड़कर , बहुत सारे खंडित धागे बनाने के लिए विदेशी आक्रमणकारीयों..., के बाद विश्व के देशों व अब तो देशी मीडिया भी इस गलिछ्ता से गलीचे वाला जीवन जी कर हिंदुत्व के ठेकेदार से “स्टार चैनल” से विदेशी संस्कृति से देश को “विकृत” कर दलाल बन कर देश को हलाल कर रहें है..,


५. विश्व चाहता है कि कैसे हम इन हिंदुस्थानी धागों को तोड़कर , टूटे धागों की गाँठ बांधकर, हमें, नए गुलामों की जमात बनाकर..., एक मजबूत रस्सी से बाँध कर रखें...,


6. हिंदुत्व तो ..., मातृत्व-माता (वन्देमातरम),/ पितृत्व-पिता (राष्ट्रवाद),/गुरुतत्व-गुरू (वैदिक वैज्ञानिक ज्ञान से गुरू है) व वासुधैव कुटुम्बकम (भाई-बहन चारा ) के असंख्य धागों का योग है... 

हम प्रतिज्ञा ले.. इस राष्ट्रवादी धागे को और मजबूत बनाएं...

Let's not make a party but become part of the country. I'm made for the country and will not let the soil of the country be sold. के संकल्प से गरीबी हटकर, भारत निर्माण से, इंडिया शायनिंग से, हमारे LONG – INNING से, “FEEL GOOD FACTOR” से देश के अच्छे दिन आयेंगें..,

Friday, 8 August 2025

वीर सावरकर नेहरू को हमेशा चेताते रहे यह स्वतंत्रता “आराम हराम है “ के नारे से सत्ता की अय्याशी देश को ले डूबेगी


 

कृपया लंबा लेख पढ़ कर , मंथन करे …,




१९४२ में वीर सावरकर ने कांग्रेसियो को चेताया की आज़ादी चाहिये तो क्रांति द्वारा, याचना व शांति द्वारा पायी गयी आजादी देश के इतिहास व नई पीढ़ी,देश की भक्ति, धर्म, संस्कार, पुरखों के बलिदान से विमुक्त होकर देश पुनः विदेशी भाषा, हाथ , साथ, विचार  व संस्कार से ग़ुलामी के जंजीरो में जकड़ते जाएगा 




और यह “भारत छोड़ों आंदोलन” छद्म है यह अंततः “भारत तोड़ो आंदोलन” बनेगा 


इसके ठीक ५ साल बाद हमे याचना से अंग्रेजों के शर्त पर खंडित हिंदुस्थान मिला 




वीर सावरकर नेहरू को हमेशा चेताते रहे यह स्वतंत्रता “आराम हराम है “ के नारे से सत्ता की अय्याशी देश को ले डूबेगी 




देश के विकास से 


पहिले देश की सीमाओं की सुरक्षा प्राथमिक है 




वीर सावरकर ने नेहरू को चुनौति देते हुए कहा था मैं सत्ता लोलुप्त नही आप मुझे २ साल के लिए राष्ट्रपति का पद दें तो मैं सेना को सुसज्जित व सबल बनकर देश का हर नागरिक गर्वित व विश्व अचंभित रहेगा 


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यदि प्रधानमंत्री भी वीर सावरकर के उद्देश्य से सिर्फ़ एक प्राथमिक नारा “घुसपैठियों भारत  छोड़ों”  का नारा सार्थक नहीं किया तो ठीक पाँच बाद सन् २०२९ में देश का नक़्शा  भारत तोड़ो से टुकड़े गैंग हावी होके रक्तपात का दौर शुरू होगा 


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इस लेख के पहिले 5 अगस्त को कश्मीर जोड़ों दिवस धारा 370 व 35 (A) को धवस्त करने की  पांचवीं वर्ष गांठ के लिए इस अविस्मरणीय दिवस के उपलक्ष्य  में हमारे सम्माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बहुत –बहुत  बधाई ...




 ८  अगस्त १९४२ भारत तोड़ो दिवस...., जिन्ना के DIRECT  ACTION दिवस  की नीव पढ़ गई  व  कवि इकबाल के झण्डा ऊंचा रहे हमारा  तिरंगा को हरे रंग के सल्तनत बनाने के पहिले 1943 को  अल्लाह को प्यारे हो गए …




वीर परमवीर दामोदर सावरकर की दमदार  भविष्यवाणी 14th अगस्त 1947 को सार्थक हुई ...




८ अगस्त  १९४२ अखंड भारत के इतिहास का विश्वास घातक दिवस .,यह “भारत छोड़ों” आन्दोलन नहीं“भारत तोड़ों” आन्दोलन है तुम्हारी तिकड़ी अखंड भारत के साथ धोखा है तुष्टिकरण से सत्तालोलुपता के “अखंड भारत” को “खंडित भारत” से देशवासियों को एक गंदी राजनीती से देश को गर्त में ले जाएगा – वीर सावरकर




८  जून १९४२ अखंड भारत के इतिहास का घातक दिवस, की ८३ वी बरसी ,देश के डाकुओं द्वारा तुष्टिकरण के अस्त्र से देश को खंडित करने का बीजोरोपण साबित हुआ ... 


पतंजली के ज्ञाता वीर ही नहीं परमवीर सावरकर की यह ४० से अधिक भविष्यवाणी वाणियों में यह एक सटीक भविष्य वाणी है.




१.             ये गांधी की ही देंन थी कि, भारत सरकार पर ५५ करोड़ रु. पाकिस्तान को देने का दबाव डाला, माउंटबैटन ने गांधीजी को पाकिस्तान को ५५ करोड़ रु. दिलवाने की सलाह दी. 


२२ अक्तूबर १९४७ को पाकिस्तान ने कश्मीर पर आक्रमण किया. कश्मीर में युद्ध चलाए रखने के लिए उसे धन की सख्त जरुरत थी. गांधीजी ने पाकिस्तान को ५५ करोड़ रूपए रोकड़ राशि में से दिलवाने के लिए, नेहरु और पटेल पर दबाव डालने हेतु, आमरण उपवास आरम्भ किया. अन्ततोगत्वा, नेहरु और पटेल उपर्युक्त राशी पाकिस्तान को देने को विवश हुए, यद्यपि बाद में पाकिस्तान को इससे भी अधिक धन-राशी भारत को देनी थी. जो आज तक नहीं मिली


२.            गांधी ने भारत – विभाजन कराने वाली भयंकर भूलों के तो बीज बो दिए थे


विघटन के बीज लखनऊ-पैक्ट (समझौते) में, जब कांग्रेस ने लखनऊ पैक्ट में दो विषाक्त सिद्धांत स्वीकार किए : पहला ,संप्रदाय के आधार पर मुसलमानों को प्रतिनिधित्व, तथा मुस्लिम लीग को भारत के सभी मुसलमानों की प्रतिनिधि संस्था मान्य.,सिद्धांत रूप में तो कांग्रेस द्वी राष्ट्रवाद को अस्वीकार करती थी, परन्तु व्यवहार में उसने लखनऊ-पैक्ट के रूप में उसे मान लिया क्योकि इसमें मुसलमानों की लिए पृथक मतदान स्वीकार किया गया था. इस प्रकार इस पैक्ट में विभाजन का बीज बोया गया.


 हिंदुस्थान के प्रतिनिधि तीन कट्टर मुसलमान थे, मार्च १९४६ में ब्रिटिश सरकार के मंत्रिमंडल के तीन सदस्य, सर स्टैफोर्ड क्रिप्स, मि.ए.वी. अलेग्जेंडर और लार्ड पैथिक लारेंस वार्ता और विचार-विमर्श के लिए भारत आए. हिन्दुओ की पूण्य भूमि हिंदुस्थान का प्रतिनिधित्व तीन कट्टर मुसलमानों ने किया. भारतीय कांग्रेस और हिंदुस्थान के समस्त हिन्दुओ के प्रतिनिधि थे कांग्रेस अध्यक्ष मौलाना अबुल कलाम आजाद. .मुहम्मद अली जिन्ना, मुस्लिम लीग के अध्यक्ष , हिंदुस्थान के मुसलमानों के प्रतिनिधि थे! नवाब भोपाल ने भारत की देसी रियासतों के शासको का प्रतिनिधित्व किया. ब्रिटिश सरकार की ओर से तीन ईसाई और हिंदुस्थान की ओर से तीन मुसलमान हिंदुस्थान के ७७ प्रतिशत हिन्दुओ के भाग्य का निर्णय करने को बैठे.




३. कांग्रेस ने हिन्दू मतदाताओं को धोखा दिया,जब.. कांग्रेसियों ने १९४६ का निर्णायक चुनाव‘अखंड भारत ’के नाम पर लड़ा था. बहुमत प्राप्त करने के बाद ,उन्होंने पाकिस्तान के कुत्सित प्रस्ताव को मान कर हिन्दू मतदाताओ के साथ निर्लज्जतापूर्वक विश्वासघात किया. वीर सावरकर ने उनकी भर्त्सना की कि जब उन्होंने निर्लज्ज होकर अपना सिद्धांत बदला है, और अब वे हिन्दुस्तान के विभाजन पर सहमत हो गए है, तो या तो वे अपने पदों से त्यागपत्र दे और स्पष्ट पाकिस्तान के मुद्दे पर पुन: चुनाव लड़े या मातृभूमि के विभाजन के लिए “जन-मत ” कराएं .




४. कांग्रेसियों ने विभाजन क्यों स्वीकार किया?इसमें गांधी की अहम छद्म अहिंसा का मूल मंत्र था,कांग्रेसियों ने मुस्लिम लीग द्वारा भड़काए कृत्रिम दंगो से भयभीत होकर जिन्ना के सामने कायरता से घुटने टेक दिए .यदि दब्बूपन, आत्म-समर्पण, घबराहट और मक्खनबाजी के जगह वे मुस्लिम लीग के सामने अटूट दृढ़ता तथा अदम्य इच्छा शक्ति दिखाते, तो जिन्ना पाकिस्तान का विचार छोड़ देता. लिआनार्ड मोस्ले के अनुसार पंडित नेहरु ने इमानदारी के साथ स्वीकार किया कि बुढापे ,दुर्बलता ,थकावट और निराशा के कारण उनमे विभाजन के कुत्सित प्रस्ताव का सामना करने के लिए एक नया संघर्ष छेड़ने का दम नहीं रह गया था.उन्होंने सुविधाजनक कुर्सीयों पर उच्च पद-परिचय के साथ जमे रहने का निश्चय किया. इस प्रकार राजनितिक-सत्ता, सम्मान और पद के लालच से आकर्षित विभाजन स्वीकार कर लिया.




५. क्या दंगे रोकने का उपाय केवल विभाजन ही था?, सरदार पटेल गांधीजी के पिंजरे में बंद एक शेर थे. उन्हें दंगाइयों के साथ “जैसे को तैसा”घोषणा करने के लिए खुली छूट नहीं थी, इसलिए उन्होंने क्षुब्ध होकर कहा था, “ये दंगे भारत में कैंसर के सामान है. इन दंगो को सदा के लिए रोकने के लिए एक ही इलाज ‘विभाजन ’है”. यदि आज सरदार पटेल जीवित होती, तो वे देखते की दंगे विभाजन के बाद भी हो रहे है. क्यों? क्योंकि जनसँख्या के अदल-बदल बिना विभाजन अधूरा था.




६. जनसंख्या के अदल-बदल बिना विभाजन का गांधी ने सुझाव ठुकरा दिया.. 


७. ⁠यदि ग्रीस और टर्की ने ,साधनों के सिमित होते हुए भी ,ईसाई और मुस्लिम आबादी का अदल-बदल कर के,मजहबी अल्पसंख्या की समस्या का मिलजुल कर समाधान कर लिया ,तो विभाजन के समय में हिन्दुस्तान में ऐसा क्यों नहीं किया गया? खेद है की पंडित नेहरु के नेतृत्व में कांग्रेसी नेताओ ने इस संबंध में डा. भीमराव आंबेडकर के सूझ्भूझ भरे सुझाव पर कोई ध्यान नहीं दिया. जिन्ना ने भी हिन्दू-मुस्लिम जनसँख्या की अदला-बदली का प्रस्ताव रखा था. परन्तु मौलाना आजाद के पंजे में जकड़ी हुई कांग्रेस ने नादानी के साथ इसे अस्वीकार कर दिया. कांग्रेसी ऐसे अदूरदर्शी थे कि उन्होंने यह नहीं सोचा कि जनसंख्या की अदला-बदली बिना खंडित हिंदुस्थान में भी सांप्रदायिक दंगे होते रहेंगे.



पाकिस्तान को अधिक क्षेत्रफल दिया गया,१९४६ के निर्णायक आम चुनाव में, अविभाजित हिंदुस्थान के लगभग सभी (२३%) मुसलमनो ने पाकिस्तान के लिए वोट दिया ,परन्तु भारत के कुल क्षेत्रफल का ३०% पाकिस्तान के रूप में दिया गया. दुसरे शब्दों में उन्होंने अपनी जनगणना की अनुपात से अधिक क्षेत्रफल मिला ,यह जनसंख्या भी बोगस थी. फिर भी सारे मुस्लिम अपने मनोनीत देश में नहीं गए.




८. झूठी मुस्लिम जन-गणना के आधार पर विभाजन का आधार माना, कांग्रेस ने १९४९ तथा १९३१ दोनों जनगणनाओ का बहिष्कार किया. फलत:, मुस्लिम लीग ने चुपके-चुपके भारत के सभी मुसलमानों को उक्त जनगणनाओ में फालतू नाम जुडवाने का सन्देश दिया. इसे रोकने वाला या जाँच करने वाला कोई नहीं था. अत: १९४१ की जनगणना में मुसलमानों की संख्या में विशाल वृद्धि हो गई. आश्चर्य की बात है कि कांग्रेसी नेताओं ने स्वच्छा से १९४१ की जनगणना के आंकड़े मान्य कर लिए, यद्यपि उन्होंने उसका बहिष्कार किया था. उन्ही आंकड़ा का आधार लेकर मजहब के अनुसार देश का बटवारा किया गया. इस प्रकार देश के वे भाग भी जो मुस्लिम बहुल नहीं थे,पाकिस्तान में मिला दिए गए.




९. स्वाधीन भारत का अंग्रेज गवर्नर जनरल की सहमती दी....,गांधीजी और पंडित नेहरु के नेतृत्व में कांग्रेस ने मुर्खता के साथ माऊंट बैटन को दोनों उपनिवेशों, हिंदुस्थान और पाकिस्तान का गवर्नर जनरल, देश के विभाजन के बाद भी मान लिया. जिन्ना में इस मूर्खतापूर्ण योजना को अस्वीकार करने की बहुत समझ थी. अत: उसने २ जुलाई १९४७ को पत्र द्वारा कांग्रेस और माऊंट बैटन को सूचित कर दिया की वह स्वयं पाकिस्तान का गवर्नर जनरल बनेगा.परिणाम यह हुआ की माऊंट बैटन स्वाधीन खंडित बहरत के गवर्नर जनरल नापाक-विभाजन के बाद भी बने रहे.




१०. सीमा-आयोग का अध्यक्ष अंग्रेज पदाधिकारी को मनोनीत किया गया ,माऊंट बैटन के प्रभाव में,गांधीजी और पंडित नेहरु ने पंजाब और बंगाल के सीमा आयोग के अध्यक्ष के रूप में सीरिल रैड क्लिफ को स्वीकार कर लिया.सीरिल रैडक्लिफ जिन्ना का जूनियर (कनिष्ठ सहायक) था, जब उसने लन्दन में अपनी प्रैक्टिस आरम्भ की थी. परिणाम स्वरुप, उसने पाकिस्तान के साथ पक्षपात और लाहौर, सिंध का थरपारकर जिला,चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र, बंगाल का का खुलना जिला एवं हिन्दू-बहुल क्षेत्र पाकिस्तान को दिला दिये




११. बंगाल का छल-पूर्ण सीमा निर्धारण किया गया,भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की उदासीनता के कारण ४४ प्रतिशत बंगाल के हिन्दुओ को ३० प्रतिशत क्षेत्र पश्चिमी बंगाल के रूप में संयुक्त बंगाल में से दिया गया.५६ प्रतिशत मुसलमानों को ७० प्रतिशत क्षेत्रफल पूर्वी पाकिस्तान के रूप में मिला.


चटगाँव पहाड़ी क्षेत्र जिसमे ९८ प्रतिशत हिन्दू-बौद्ध रहते है,एवं हिन्दू-बहुल खुलना जिला अंग्रेज सीमा-निर्धारण अधिकारी रैडक्लिफ द्वारा पाकिस्तान को दिया गया.कांग्रेस के हिन्दू नेता ऐसे धर्मनिरपेक्ष बने रहे की उन्होंने अन्याय के विरुद्ध मुँह तक नहीं खोला.




१२. सिंध में धोखे भरा सीमा-निर्धारण किया, जब सिंध के हिन्दुओ ने यह मांग की की सिंध प्रान्त का थारपारकर जिला जिसमे ९४ प्रतिशत जनसँख्या हिन्दुओ की थी,हिंदुस्थान के साथ विलय होना चाहिए,तो भारतीय राष्ट्रिय कांग्रेस ने सिन्धी हिन्दुओ की आवाज इस आधार पर दबा दी की देश का विभाजन जिलानुसार नहीं किया जा सकता.परन्तु जब आसाम के जिले सिल्हित की ५१ प्रतिशत मुस्लिम आबादी ने पकिस्तान के साथ जोड़े जाने की मांग की,तो उसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया.


मजहब के आधार पर विभाजन-धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध गांधी का खेल था... यदि गांधीजी पंडित नेहरु सच्चे धर्म-निर्पेक्षतावादी थे तो उन्होंने देश का विभाजन मजहब के आधार पर क्यों स्वीकार किया?

Monday, 14 July 2025

“ निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल। बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।





 




कृपया इस पोस्ट को ध्यान से पढ़े, मंथन ,चिंतन कर राष्ट्र भाषा व मातृभाषा के पतवार के उपयोग से डूबते देश के नाव को बचायें…

हिंदी दिवस …!!!, विदेशी भाषा द्वारा इसे चिंदी दिवस के नाम से हर साल मखौल उड़ाया जाता है 
देश पर अंग्रेज़ी हावी…, अंग्रेज़ी रोटी देने वाले व संभ्रांत लोगों की भाषा.. की भ्रांति से देश के प्रति मुर्दानगी से नर व नारी में मर्द व मर्दानी की भावना नदारद ..  व विदेशी हाथ साथ विचार संस्कार से देश की संरचना के बदलाव की भावना से विदेशी इशारे से NGO को धन से लबालब कर देश में “भारत तेरे टुकड़े होंगे … इंशाअल्लाह .. “ JNU में तो अपने को नेहरू के DNA से जन्में हिंदू छात्र छात्रा भी इस नारे का उद्घोष से क्रांतिकारी घोषित करने का दम्भ भर रही थी… 
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यह चित्र मोदीजी, भारतमाता व राष्ट्र को समर्पित 

अब अंग्रेजी नही बनेगी राष्ट्र के युवाओं को रोटी देने वाली भ्रम की भाषा..., देश को जकड़ने वाली अंग्रेजी भाषा की  देशी व क्षेत्रीय भाषाओं के प्रभुत्व से अब देश की बेड़ियाँ टूटेगी....

अब देश में उच्च शिक्षा 11 देशी भाषाओं में पढ़ाई जाएँगी

याद रहे .....
भारतेंदु हरिश्चंद्र मात्र 34 साल जीवन जीने वाले जो साहित्यकार, पत्रकार, कवि और नाटककार थे  

1850 के आसपास के भारत में भ्रष्टाचार, प्रांतवाद, अलगाववाद, जातिवाद और छुआछूत जैसी समस्याएं अपने चरम पर थीं. तब उन्होने देश भर  में अपने नाट्य मंचों को हिन्दी व क्षेत्रीय भाषाओं से समाज की आँखें खोलने मेँ एक अहम भूमिका निभाई
 
जिन्होने विश्व को यही सार्थक उक्ति कही थी   संदेश दिया था कि मातृभाषा से ही देश की उन्नती है  

“ निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल।
बिन निज भाषा-ज्ञान के, मिटत न हिय को सूल।।
विविध कला शिक्षा अमित, ज्ञान अनेक प्रकार।
सब देसन से लै करहू, भाषा माहि प्रचार।। ”

निज यानी अपनी भाषा से ही उन्नति संभव है, क्योंकि यही सारी उन्नतियों का मूलाधार है।

मातृभाषा के ज्ञान के बिना हृदय की पीड़ा का निवारण संभव नहीं है।

विभिन्न प्रकार की कलाएँ, असीमित शिक्षा तथा अनेक प्रकार का ज्ञान,
सभी देशों से जरूर लेने चाहिये, परन्तु उनका प्रचार मातृभाषा के द्वारा ही करना चाहिये।

संक्षेप्त में अंग्रेजी भाषा जो देश को गुलाम रखने वाले अंग्रेजों के अंग्रेजों के पिल्लूओ ने  हिन्दी के साथ क्षेत्रीय भाषा जो देश की व क्रांतिकारियों की भाषा थी जिसे आज भी एक सुनोजियत षडयंत्र के तहत समाप्त किया जा रहा था उसकी समाप्ती का दौर आ गया है  
      
विदेशी भाषा को चंद लोग जानने वाले देश पर आज भी विदेशी राष्ट्रो के इशारों  से देश की राष्ट्रवाद व राष्ट्रनीती (धर्म परिवर्तन, घुसपैठियों  का संगठन से वोट बैंक बनाकर व देश का कायरता का  झूठा इतिहास पढ़ाकर देश को खंडित भारत की उपमा से देश के टुकड़े करने की नीती की योजना बना रहे थे ) बदलकर राजनीति की चासनी से देश पर राज कर देश को डूबाने का ही काम कर  रहें हैं  
सुदूर क्षेत्रीय भाषा के  गरीब तबकों  के अभिभावक भी भारी स्कूल फीस भरकर अपने बालकों को अंग्रेजी भाषा  में शिक्षण  देकर देश की मुख्य  धारा से अलग कर, वह छात्र मूक विदेशी भाषा का अनुसरण तो करता है पर वह उसके पल्ले नही पड़ता है
 
8वीं  कक्षा के बाद उसे अंग्रेजी भाषा के पल्ले पड़ने  का  एहसास होता है व मैट्रिक में पहुँचने तक वह भाषा का ज्ञान लेते रहता है 
तब तक वह विदेशी भाषा के बोझ तले दबता हुआ शिक्षा का अधूरा ज्ञान ग्रहण करता है 
विश्व के जिन देशों ने स्वदेशी भाषा में शिक्षा  का प्रसार किया है आज अंग्रेजी भाषा के देश उनसे पिछड़ते जा रहें है 

जापान मेँ 10 वी का छात्र अपनी भाषा से आगे अनुसंधान के लिए पढ़ाई करता है जबकि हमारे देश का  छात्र रोजगार वाले क्षेत्र के लिए पढ़ाई में अपने को बंधुवा अफसर बनाने के लिए आतुर व गर्व में रहता है   

अपनी भाषा में अनुसरण कर अति उन्नत देशों में इस्राइल रूस फ्रांस जापान स्पेन पोलैंड जर्मनी स्विट्ज़रलैंड चीन डच इटली जैसे अनेक देश हैं 
और हम हैं सत्ता परिवर्तन के 7८ सालों बाद भी उक्त देशों से तकनीकी व हथियार खरीद कर देश के राजस्व का बड़ा भाग बर्बाद कर रहें  हैं व विदेशी निवेश से देश  को पंगु बना रहें  हैं

Thursday, 10 July 2025

GURU PURNIMA - DEDICATED TO SAVARKAR



सावरकर , आपकी आत्मा को आशीर्वाद , आप के अदम्य साहस से विश्व के क्रांतिकारियों के प्रेरक  बनकर  “विश्व गुरु “ से इस युग के आदर्श  की महक

Savarkar, blessings to your soul, by your indomitable courage, by becoming the inspiration for the revolutionaries of the world, you spread the fragrance of the ideals of this era from the "Vishwa Guru"